मेहरबान
Saturday, December 11, 2010
काफी देर से बर्बाद किया!
गम इस बात का नहीं की छोड़ दिया राह अकेला हमको,
दुःख तोह इस बात का है की काफी दूर लाकर छोड़ा और देर भी लगा दी!
- सपन
Monday, November 29, 2010
Wednesday, November 10, 2010
ये ग्यारह नवम्बर की आधी रात याद रहेगी .....हमेशा!!
रब रूठा...सब लुटा...
सपन ये जान ले ....
ये प्यार ...मोहब्बत...इश्क.... है सब झूठा...!!!
- सपन
Thursday, November 4, 2010
Wednesday, November 3, 2010
उड़ान का एक रूप.: .....सर झुका कर उड़ने से बेहतर तो, सर उठा कर चलना अच्छा है!...
...की ज़मीं पर चलना ही भूल जाओ ...कहीं गिरे औंधे मुह,
...तो सम्हालना मुश्किल हो जायेगा ...सारी ज़मीं तो ठीक से देख ही लो,
...ताकि असमान से ज़मीं को देखते वक़्त कहीं सर न झुकाना पड़े !!
.....सर झुका कर उड़ने से बेहतर तो, सर उठा कर चलना अच्छा है!
-सपन
मेरा उत्तर साहिर लुधियानवी को .....
के.....कहाँ है कहाँ है मुहाफ़िज़ खुदी के....?....जिन्हें नाज़ है हिंद
पर,वो कहाँ हैं....???? - साहिर लुधियानवी
मेरा उत्तर:
वो यहीं है यहीं कहीं है जिन्हें नाज़ है हिंद पर,
बस उकसाने की देर है, और इस समय का फेर है,
जनका लुटा कारवां.. जो हो गये बेघर,
हैं शांत जो...न समझ उन्हें कायर,
बरस जो पड़े तो कोई बाँध न रोक पायेगा,
तुम ही हो - हम ही हैं..... वो जिन्हें नाज़ है हिंद पर,
यही कहीं छुपा बैठा है वो हम सब में, बस निकलने की देर है,
वो यहीं हैं यहीं कहीं हैं..... जिन्हें नाज़ है हिंद पर!!
-सपन
Monday, November 1, 2010
सितारों की शाजिश!!
वैसे ये सितारे भी कम नहीं...जो जान कर अँधेरे में निकलते हैं!
-सपन
Tuesday, October 26, 2010
अह्ह्ह ...वो हाऊसिंग लैब!!
अह्ह्ह्ह ....
........
...वो बालकोनी ...जहाँ घंटो समय बिताया,
...वो ब्लैक बोर्ड जहाँ चावक से लिख केर देते थे परिचय हर चीज़ का,
...वो अलमारी जहाँ दुनिया भर की सारी शरारतों के सामान को संजोया,
...वो कुर्सियां ... जिन पर चित्र बनाना याद आता है ...उस पर सबका मुझे डांटना तो बहुत ही याद आता है,
...वो बड़ी बड़ी मेज़ जिन पर सोते हुए दिन में सपने देखे,
...वो नोटिस बोर्ड जहाँ साड़ी अच्छी बुरी खबरें चिपका करती थी,
...वो बड़े बड़े भारी दरवाज़े ...जिन्हें रात में जाते हुए बंद करना, और वो पतला ख़ुफ़िया दरवाज़ा जिस में से चुप चाप घुसना ...याद आता है,
...वो प्रोफेस्सर के आते हे लैब में केर्फिऊ लगना...
...वो सबकी अपनी अपनी जगह ...वो सबको परेशां करना ...वो लैब में खेलते हुए मस्ती ...वो तेज़ म्यूजिक और डांस करना ...कभी कभी थोडा बहुत काम करना ...
अह्ह्ह ...वो हाऊसिंग लैब जहाँ दो साल बिताए ...कभी कभी मिस करता हु ..... -सपन
एक लड़की.....
कुछ सवाल.....जिन्दगी से...
कहाँ गया वो जो था हर रिश्ते से बढकर,
कहाँ गया वो जिसने जीना सिखाया,
कहाँ गया वो जिसने रोते हुए हसाया,
कहाँ है वो जो न रहने देता था तनहा अकेली,
कहाँ गया वो जो करता था हर जिद पूरी,
उसकी राजकुमारी थी मैं, आज जिद किस्से करूँ,
आज जब हूँ तनहा अकेली, तो क्यों नहीं आता वो,
कहाँ है वो जिसे खोजती हैं ये नम निगाहें,
कभी कभी लगता है की क्या.....
...कोई मुझे इतना प्यार दे पायेगा,
कहाँ गया वो.................................
कुछ जवाब.....जिन्दगी को...
उसकी सुनाई कहानिया भले ही आज धुंधली हो चुकी हों...
...मगर वो अक्सर कहता था "जो कुछ भी होता है अच्छे के लिए होता है"
...बस यही सोच कर जिन्दगी में आगे बढती जा रही हूँ,
आज जिस मुकाम पर मैं हूँ...देख कर खुश तो जरूर होते तुम,
..............हर जगह तारीफ़ करते फिरते तुम.......................
क्या हुआ जो...
...मेरे वजूद को बनाने वाले का आज खुद ही कोई वजूद नहीं है,
पर उसका साया मेरे साथ हमेशा है,
बस...इसी विस्वास के सहारे जिन्दगी को सरल बनाना है,
तो क्या हुआ जो...
...जिन्दगी के दुसरे पड़ाव में आते ही, दुनियादारी सीखनी पड़ी,
कभी कभी समय से पहले बड़े होना पड़ता है.....
भले ही डरती हूँ किसी पर विस्वास करने से.....
...मगर यही डर मुझे किसी पर विस्वास करने लायक बनाएगा,
मैं किसी को दर्द नहीं जताती तो क्या...मुस्कराहट पर भी बहुत कुछ लिखा होता है,
अब तो एक ही ऐसा एहसास है मुझे ....
की जब भी ये मन उदास होता है ...कोई आस पास होता है ...
मुझे पता है... वो तुम हो .....तुम ही हो ..............................पापा.....
- सपन