मेहरबान

Saturday, December 11, 2010

काफी देर से बर्बाद किया!

दिला कर आस उस मुकम्मल जहाँ की.....छोड़ा है हमे आज इस मुकाम पर,
गम इस बात का नहीं की छोड़ दिया राह अकेला हमको,
दुःख तोह इस बात का है की काफी दूर लाकर छोड़ा और देर भी लगा दी!

- सपन