मेहरबान
Tuesday, April 28, 2020
खुमार
ऐसा नशा छाया है खुमारी का...की बस यही चाह है, वक़्त यहीं थम जाए! ....हाँ पता है वक़्त कभी रुकता नही... किसी के लिए.... कम से कम सामने रुकी हुई घड़ी ही रख दो!
Wednesday, January 1, 2020
उनीस-बीस का फर्क
क्या ये नया साल?
क्या ये नया दिन?
और ...क्या ये नई सदी?
....
जहां देखो वहां लोगों ने यादों का तांता लगा रखा है..
काफी लोग वर्तमान को भूल भविष्य के दशक को संजोंने की बात करते हैं...
मेरे लिए तो वो ही बुधवार...वो है सुबह...वो है शाम...
बस...उन्नीस-बीस का फर्क है...
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