शाब्दिक छायावाद
यु हीं अचानक मेरे जाह्न में.....आये जुबान पर..... और ...निकले कलम से.....
मेहरबान
Wednesday, January 1, 2020
उनीस-बीस का फर्क
क्या ये नया साल?
क्या ये नया दिन?
और ...क्या ये नई सदी?
....
जहां देखो वहां लोगों ने यादों का तांता लगा रखा है..
काफी लोग वर्तमान को भूल भविष्य के दशक को संजोंने की बात करते हैं...
मेरे लिए तो वो ही बुधवार...वो है सुबह...वो है शाम...
बस...उन्नीस-बीस का फर्क है...
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