शाब्दिक छायावाद
यु हीं अचानक मेरे जाह्न में.....आये जुबान पर..... और ...निकले कलम से.....
मेहरबान
Tuesday, April 28, 2020
खुमार
ऐसा नशा छाया है खुमारी का...की बस यही चाह है, वक़्त यहीं थम जाए! ....हाँ पता है वक़्त कभी रुकता नही... किसी के लिए.... कम से कम सामने रुकी हुई घड़ी ही रख दो!
No comments:
Post a Comment
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment