वो कहते हैं, हर किसी को मुक्कमल जहाँ नहीं मिलता!
मैं कहता हूँ, दिल से चाहो तो क्या नहीं मिलता!?
वो कहते हैं, चाहने से क्या होता है!?
मैं कहता हूँ, चाहने से 'रब' मिलता है!
वो कहते हैं, ये क्वाबों में ही होता है,
मैं कहता हूँ, ये हकीकत में भी होता है,
वो कहते हैं, दिखा! कहाँ है तेरा रब?
मैं कहता हूँ, यहीं है मेरा रब,
...आजकल ‘इंसान रुपी माया’ में
इसी ज़मीन पर, मेरे साथ रहता है!
-सपन