मेहरबान

Monday, April 29, 2019

एक ही हूँ!

खुशनसीब हूं मैं...जो लगभग सभी रिश्तों से जुड़ा हूँ!
माँ, बहन, प्रेमिका (जो अब बीवी भी है), बेटी और मेरी सास...
मेरे लिए वो पांच हैं...मगर उनके लिए तो मैं 'एक' ही हूँ...
सोचता हूँ कभी कभी की... क्या में निभा पाता हूँ?

जान

आदमी भी एक सांप की तरह है...
हर दफा 'जान' एक केचुली की तरह बदलता है!
...पहले माँ, फिर माशूका...अब बेटी है उसकी जान.

हैदराबाद!

...नए चहरे...ये नया शहर,
वैसे तो नया नही है....,
कहते है निजाम रहा करते थे!
....मगर ये ...नवाब क्या कर रहा है यहां!

-सपन