यु हीं अचानक मेरे जाह्न में.....आये जुबान पर..... और ...निकले कलम से.....
आदमी भी एक सांप की तरह है... हर दफा 'जान' एक केचुली की तरह बदलता है! ...पहले माँ, फिर माशूका...अब बेटी है उसकी जान.
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