मेहरबान

Wednesday, November 3, 2010

उड़ान का एक रूप.: .....सर झुका कर उड़ने से बेहतर तो, सर उठा कर चलना अच्छा है!...

...आस्मां में कहीं इतना न उड़ना ...ऐ मेरे दोस्त,
...की ज़मीं पर चलना ही भूल जाओ ...कहीं गिरे औंधे मुह,
...तो सम्हालना मुश्किल हो जायेगा ...सारी ज़मीं तो ठीक से देख ही लो,
...ताकि असमान से ज़मीं को देखते वक़्त कहीं सर न झुकाना पड़े !!


.....सर झुका कर उड़ने से बेहतर तो, सर उठा कर चलना अच्छा है!

-सपन

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