शाब्दिक छायावाद
यु हीं अचानक मेरे जाह्न में.....आये जुबान पर..... और ...निकले कलम से.....
मेहरबान
Thursday, November 4, 2010
एक सोच...
.....सर झुका कर उड़ने से बेहतर तो, सर उठा कर चलना अच्छा है!
-सपन
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