शाब्दिक छायावाद
यु हीं अचानक मेरे जाह्न में.....आये जुबान पर..... और ...निकले कलम से.....
मेहरबान
Monday, November 29, 2010
अपने - पराये
मर कर तो दूर अपने होते हैं,
जिन्दा रह कर दूर तो पराये हो जाते हैं!!
- सपन
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