कुछ सवाल.....जिन्दगी से...
कहाँ गया वो जो था हर रिश्ते से बढकर,
कहाँ गया वो जिसने जीना सिखाया,
कहाँ गया वो जिसने रोते हुए हसाया,
कहाँ है वो जो न रहने देता था तनहा अकेली,
कहाँ गया वो जो करता था हर जिद पूरी,
उसकी राजकुमारी थी मैं, आज जिद किस्से करूँ,
आज जब हूँ तनहा अकेली, तो क्यों नहीं आता वो,
कहाँ है वो जिसे खोजती हैं ये नम निगाहें,
कभी कभी लगता है की क्या.....
...कोई मुझे इतना प्यार दे पायेगा,
कहाँ गया वो.................................
कुछ जवाब.....जिन्दगी को...
उसकी सुनाई कहानिया भले ही आज धुंधली हो चुकी हों...
...मगर वो अक्सर कहता था "जो कुछ भी होता है अच्छे के लिए होता है"
...बस यही सोच कर जिन्दगी में आगे बढती जा रही हूँ,
आज जिस मुकाम पर मैं हूँ...देख कर खुश तो जरूर होते तुम,
..............हर जगह तारीफ़ करते फिरते तुम.......................
क्या हुआ जो...
...मेरे वजूद को बनाने वाले का आज खुद ही कोई वजूद नहीं है,
पर उसका साया मेरे साथ हमेशा है,
बस...इसी विस्वास के सहारे जिन्दगी को सरल बनाना है,
तो क्या हुआ जो...
...जिन्दगी के दुसरे पड़ाव में आते ही, दुनियादारी सीखनी पड़ी,
कभी कभी समय से पहले बड़े होना पड़ता है.....
भले ही डरती हूँ किसी पर विस्वास करने से.....
...मगर यही डर मुझे किसी पर विस्वास करने लायक बनाएगा,
मैं किसी को दर्द नहीं जताती तो क्या...मुस्कराहट पर भी बहुत कुछ लिखा होता है,
अब तो एक ही ऐसा एहसास है मुझे ....
की जब भी ये मन उदास होता है ...कोई आस पास होता है ...
मुझे पता है... वो तुम हो .....तुम ही हो ..............................पापा.....
- सपन
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