मेहरबान

Tuesday, October 26, 2010

अह्ह्ह ...वो हाऊसिंग लैब!!

अह्ह्ह्ह ....
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...वो बालकोनी ...जहाँ घंटो समय बिताया,
...वो ब्लैक बोर्ड जहाँ चावक से लिख केर देते थे परिचय हर चीज़ का,
...वो अलमारी जहाँ दुनिया भर की सारी शरारतों के सामान को संजोया,
...वो कुर्सियां ... जिन पर चित्र बनाना याद आता है ...उस पर सबका मुझे डांटना तो बहुत ही याद आता है,
...वो बड़ी बड़ी मेज़ जिन पर सोते हुए दिन में सपने देखे,
...वो नोटिस बोर्ड जहाँ साड़ी अच्छी बुरी खबरें चिपका करती थी,
...वो बड़े बड़े भारी दरवाज़े ...जिन्हें रात में जाते हुए बंद करना, और वो पतला ख़ुफ़िया दरवाज़ा जिस में से चुप चाप घुसना ...याद आता है,
...वो प्रोफेस्सर के आते हे लैब में केर्फिऊ लगना...
...वो सबकी अपनी अपनी जगह ...वो सबको परेशां करना ...वो लैब में खेलते हुए मस्ती ...वो तेज़ म्यूजिक और डांस करना ...कभी कभी थोडा बहुत काम करना ...

अह्ह्ह ...वो हाऊसिंग लैब जहाँ दो साल बिताए ...कभी कभी मिस करता हु ..... -सपन

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