मेहरबान

Tuesday, December 1, 2015

कन्धा

जिन कन्धों पर देखा सारा जहाँ .. ...ता उम्र लिया था अपने कन्धों पर जो मेरा बोझ... जिसने कंधे तक लाकर चलना भी सिखाया.. आज वो ओझल हो गया अचानक...दीखता कही नहीं है... ..उस कंधे का सहारा चाहिए.. जिसको अभी मैं कन्धा देकर आ रहा हु!

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