मेहरबान

Tuesday, September 11, 2012

...कुछ कर सकता हु क्या?!

यूंही काम में मशगूल मैं, बस अपना काम किये का रहा था, एक तरफ लैपटॉप से ऊदेडबुन, तो दूसरी तरफ कंप्यूटर से झूझ रहा था, वहीँ कहीं पीछे से टी वी पर समाचारों की बोछार- भारत में भ्रष्टाचार...!! कोई 'असीम' नाम के चित्रकार को पोलिस ने पकड़ लिया- के, उसने अशोक की लाठ का मजाकिया चित्र बनाया..! एक आम आदमी की तरह ही मैं भी मन ही मन सोच रहा था की 'क्या होगा इस देश का?..!' की तभी अचानक, लैपटॉप ने काम करना बंद कर दिया- कारण था एक 'पेनड्रिव'. काफी देर सोचा और समय दिया की शायद अपने आप ही ठीक हो जायेगा. लैपटॉप और उस संक्रमित पेनड्रिव से ध्यान हटाकर मैं टी.वी. देखने लगा और यही सोचने लगा की, एक चित्रकार जब अपनी कला के माध्यम से देश को बदलने की सोच सकता है. तो, मैं एक वास्तुविद होकर के कुछ कर सकता हु क्या?! मेरे जहन में ये सवाल घूम ही रहा था की अचानक मेरे लैपटॉप से एक सन्देश उठा..... (a window poped-up in my laptop) ''Your pendrive is corrupt!, do you want to format your pendrive?'' -सपन

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